आ भी जाओ(आध्यात्मिक)-160

आ भी जाओ अब तुम कुछ और ना बताया करो

बहाने तरह तरह के तुम कुछ और ना बनाया करो

--आ जाने से तुम्हारे ये दिल मचल सा उठता है

  प्यार की हिलोरें वो बार बार ले उठता है

--तुम कैसे समझोगे बिछड़न की इस तड़पन को

  कैसे बताऊँ फिर से मैं अपनी ही इस भटकन को 

--कहती हूँ कितनी बार तुम आते रहा करो यूँ ही

  लगती विरह की आग को आकर मिटाओ तुम ही

                               👣🙏🏻

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

याद आपकी-428

दृष्टा-425

कर्म -426