सागर के बीचों बीच(सामाजिक)-164

सागर के बीचों-बीच से छुपकर

सूरज जब घर को लौट जाता है

दुनिया उसको देखने दौड़ी आती 

सनसैट (sunset) वो कहलाता है

दृश्य सुहाना हो जाता है......

जल में वो डूबता दिखता है

लाल रश्मियाँ देकर जल को

सुन्दरता बिखराता जाता है

थककर चूर जब हम हो जाते 

मुँह लटकाये घर आया करते हैं

नया प्रकाश,नई प्रेरणा,नई वो ताक़त 

क्यों सूरज से हम ना ले पाते हैं

अन्दर का सूरज बुझ ना पाये

हम सब यही प्रार्थना करते हैं

प्रेरणा पुन्ज बने यह सूरज

जो सबको उर्जा से भरते हैं

                👣🙏🏻



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