साधक(सामाजिक)-98
साधक कहते हैं जो ख़ुद को कभी साधना का मर्म ना जाने दुखियारों का दु:ख ना पूछे अंहकार बस रहे हैं पाले सीना ताने चलते हैं वो अनुशासन सब को सिखलाते ख़ुद अनुशासन सीख ना पाये बड़ी-बड़ी बातें बतलाते दम के बल पर-धन के बल पर जो तुम आये हो इठलाते मरते दम तक सुधर न पाये संग में कुछ ना ले जा पाये छोड़ यहीं पर सब जाना है फिर काहे का घमंड दिखाना मरने के बाद सूक्ष्म शरीर से फिर आपस में सब मिलने आना 💔💔🖤💔💔