आप आयें(आध्यात्मिक)-102

आप आयें या न आयें 

दिल में बसाये रखियेगा

जब भी मुझको याद सताये 

दिल में ही मुझको दिखियेगा

अन्तर्मन में जब साज बज उठें

तब संग में आप भी रहियेगा

ज्यों-ज्यों भाव हिलोरें जागें

मुझको सँभाले रखियेगा

राग-द्वेष से बचकर निकलूँ

हाथ को पकड़े रहियेगा

लोभ-मोह की चादर को 

दूर ही मुझसे रखियेगा

भाव कभी भी बिगड़ न पायें

मन ऐसा बनाये रखियेगा

सत्कर्मों की बाढ़ बढ़ी रहे

बस ऐसे ही चलाये  रखियेगा

                   👣🙏🏻


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