सजदा(आध्यात्मिक)-100
सजदा किया जब चरणों में तेरे
मुझको जाने क्या महसूस हुआ
अजब तरंगें अजब सी ख़ुशबू
जिनका अच्छा सा भान हुआ
ग़ज़ब की ठंडक अजब सी गर्मी
मुझको कैसा ये अहसास हुआ
छोड़ी जो तुमने शक्ति तुम्हारी
मेरा तभी तो ऐसा हाल हुआ
मुर्दे की सी अकड़ का मुझमें
जब-जब भी सँचार हुआ
तब-तब तुमने आकर मुझको
अपने हाथों प्यार से छुआ
हाथ तुम्हारा मेरे सिर पर
यूँ ही हमेशा बना रहे
मेरे दाता प्यार की पुलकन
अकड़ को मेरी मिटाती रहे
👣🙏🏻
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