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विश्वास की डोर--406

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विश्वास की डोर से बंधे हो तुम तुम्हारे सिवा... भरोसा नहीं है किसी पर मुझको तभी तो याद आता है... तुमसे दूर जाने का वो दिन जब श्रद्धा और विश्वास से बनाई गई फूलों की मालाओं को गले में पहनाने की बजाय तुम्हारे दोनों चरणों में इस तरह बांध दिया मैंने जैसे मां यशोदा अपने लाड़ले को... कहीं भाग जाने के डर से बांध दिया करतीं थीं और तुम.... तुम देखकर मुस्कराये ही जा रहे थे शायद यह सोचकर कि पगला गया हूं मैं.... वो गुलाब के फूल जो कांटों से निकलकर तुम्हारे लिए हार बनकर आये थे उन्हीं गुलाब के कांटों में अपने लिए जगह बना रहा था मैं तुझसे मोहब्बत भला कांटों की सेज से कम तो नहीं तभी तो लोग इस राह पर चलने वालों को पागल करार कर दिया करते हैं !!                             @शशिसंजय                                  19/3/2020

शादी की रस्म--405

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शादी की रस्म अदायगी में कंगना खुलाई की एक रस्म हुआ करती है जिसमें दूल्हा और दुल्हन के हाथों में बंधे धागों की ढेर सारी गांठें एक दूसरे से खुलवाई जाती हैं रस्म का तो पता नहीं कि किसने बनाई होगी लेकिन... इतना तो जरूर तय है कि जीवन में कभी किसी के प्रति मन में दुर्भावनाओं की गांठें लग भी जायें तो.... उन्हें हमेशा खोलते रहना ताकि रिश्तों की मिठास बनी रहे यही प्रेरणा रही होगी इस रस्म के पीछे लेकिन इतना आसान नहीं... मन को खुला रखना... अतीत और वर्तमान की... कढ़वी गांठों की पोटलियों को मजबूत हाथों से खोलना कुछ भी हो... मगर खोलनी तो पड़ेंगी ही  मन की और दिल की गांठें अन्यथा चुभती ही रहेंगी हमेशा ही रिश्तों में पड़ी ये गांठें शायद इसीलिए खुलवाई जाती होंगी दूल्हा दुल्हन से ये मजबूती से बांधी गई ये बहुत सारी गांठें !!                       @शशिसंजय                            18/3/2020

दूर होकर भी--404

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दूर होकर भी हमेशा ही पास होने का एहसास करा जाते हो बिन बोले बिना देखे ही मेरे घावों पै मरहम लगा जाते हो भ्रम की घड़ियों के अधर में सोचता हूं कि तुम नहीं हो मेरे आस पास उसी क्षण अपनी मौजूदगी महसूस करा जाते हो फ़िर भी मैं ढूंढता हूं हमेशा दोस्त और दुनिया में सहारा और एक तुम हो.... जो सदा ही बिना जताये दिये ही चले जाते हो मैं अगर कुछ भी किसी को दे जाता हूं जरुरत के समय तो सुनाता भी बहुत हूं तुम देकर भी हर वक्त मुस्कराये ही चले जाते हो हर छोटे-बड़े गुनाहों को मेरे हमेशा ही माफ़ किया है तुमने कुछ ऐसा ही कर सकूं मैं भी किसी भी तरह.... मुझको भी तो ये हुनर सिखाया होता तुमने !!                  @शशिसंजय                       17/3/2020

मां तुमने--403

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समस्त विश्व की महामारी (कोरोनावायरस) से रक्षार्थ समस्त गायत्री परिवार के परिजनों को गायत्री साधना एवं महामृत्युंजय मंत्र की साधना के निर्देश शांतिकुंज से मिलने पर भावांजलि !! मां तुमने अपने आंचल में पूरे विश्व को ढकना चाहा इसीलिए सबकी रक्षा हित फ़िर से साधन शुरू कराया हम बच्चे तो शरणागत ही हैं शरण में रहते आये हैं लेकिन.... पूरी वसुधा के हित तुमने कितने ही संकल्प कराये हैं जब जब विपदा कहीं भी आई तब तब रोकर तुम्हें पुकारा तुम भी हमेशा दौड़ी आईं सब बच्चों को देने सहारा दुनिया के आंचल से हटकर तेरा आंचल प्यारा है मां इस आंचल से बढ़कर कोई दूजा आंचल नहीं है प्यारा मां तू ही हम सबका सहारा !!                     @शशिसंजय

शक्ति की है--402

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शक्ति की है दुनिया सारी पूरी सृष्टि ही शक्ति है रखना नहीं आया हमको तो डूब गई ये हस्ती है बराबरी का दर्जा पाकर जिम्मेदारी से भटके हैं माया ममता मोह बड़प्पन सबका भान भी भूले हैं धन के लालच की ताक़त ने सब रिश्तों को बर्बाद किया रिश्तों के अपनेपन में भी हमने मर्यादाओं को लांघ दिया सती अनुसूया सीता जैसी प्रतिभाशाली होती थीं नारी सुविधाओं के बलबूते जीतीं अब संघर्ष नहीं कर पातीं नारी बनना होगा एक बार फिर मदालसा जैसी मातायें बना सकें संतानों को फिर से कि भूल सकें ना वो मर्यादाएं                     @शशिसंजय                       13/3/2020

अन्तर का उल्लास--401

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अन्तर का उल्लास यहां पर अन्दर ही सब खुशियां हैं बाहर के आडम्बर से अच्छी अपने भीतर की ये दुनिया है ना कोई रिश्ता ना कोई बन्धन ना ही कोई दुनियादारी है अन्तर में तेरे संग होते ही मिल जाती खुशियां सारी हैं केवल तू ही तू दिखता है चारों तरफ ही ख़ुशबू है तेरी आभा के घेरे में बस तन मन सब भीगा बुद्धू है बुद्धू बनकर रहना आना इसमें ही तो मस्ती है बिन दीखे तू खेल दिखाता कुछ ऐसी तेरी हस्ती है !!                   @शशिसंजय                       10/3/2020

मन की होली--400

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मन की होली खेलूं तुमसे मन को अपना कर डालो रंग बिरंगे फूलों से कुछ इत्र से अब महका डालो तन तो बेसुध पड़ा रहे बस ध्यान में तेरे डूबी रहूं इतना गहरी चली जाऊं मैं दर पर तेरे पड़ी रहूं दुनिया की कुछ ख़बर रहे ना इतना बेख़बरी कर डालो मोह लोभ का रंग चढ़े ना ऐसा मुझ पर रंग डालो तोड़ के सारे मोह के बन्धन अपने बन्धन में कर डालो तेरे सिवा ना कोई जग में पक्का सबक ये रटवा दो खेलूं होली तुमसे केवल हर पल मेरा ऐसा हो रंग बिरंगे रूप तुम्हारे देख के मन खुश होता हो !!                  @शशिसंजय                       10/3/2020