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कैसी प्रीत -423

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कैसी प्रीत की लगन लगी है कैसे तराने प्यार के गाऊं जाने अंजाने जब से मिला हूं तेरी ही छांव में पलता गया हूं क्या-क्या मन को याद दिलाऊं कैसे मैं शुकराना  गाऊं तू ही सब कुछ मेरा है बस सब कुछ मुझमें तू ही है कैसे प्यार को भूलूं तेरे प्रीतम मेरा तू ही है तेरे प्यार से गढ़ा गया मैं तुझको छोड़ कहां जाऊं दिल से दिल तक तार जुड़ा है तुझमें विलय-विलय हो जाऊं कैसे तराने प्यार के गाऊं कैसे मैं शुकराना गाऊं !!

अतीत- 422

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अतीत की यादों के सहारे.. वर्तमान में जीना सुकून भरा होता है तेरे साथ बिताये एक- एक पल को ख्वाबों में सजाना कितना सुखद होता  है..  तेरी बातें , तेरी यादें, तेरा मुस्कुराना और अचानक क्षितिज में कहीं खो जाना.. जैसे कल की ही बात हो..  तेरी यादों के सहारे जीवन का बढ़े जाना भी.. लबालब खुशबुओं से भरा होता है !!

होली की याद -421

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मैंने खेली होली तुम संग थी मैंने तुम संग.... पहले चरनन गुलाल लगाई ऊपर से फिर फूल बरसाई मुख पर चन्दन अबीर लगाई तुम तो ऐसे सज गये दाता जैसे सज गये हों रघुराई मैंने तुम संग..... हर होली मुझे याद है आती अंखियां अविरल अश्रु बहाती रह-रह कर तेरी याद दिलाती अब तो आ जाओ मेरे दाता तुम संग खेलुंगी फिर होली मैंने तुम संग......

होली गीत -420

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मन खेले मेरा होली "तुम संग" खेले मेरा मन होली मात-पिता के घर में आकर अपने ऊपर नित इठलाकर खेलूं सब संग होली मन खेले मेरा होली पिय घर से मैं निज घर आई खेल फाग ख़ूब धमाल मचाई भीतर से बाहर तक रंग गई खेली चहुं दिशि होली मन खेले मेरा होली "गुरु घर" मेरा जनम जनम से आवत जात रहि कबहु कबहु से जनिमन से हूं भटकत आई अब खेलूं गुरु संग होली मन खेले मेरा होली                            11/3/22  

कान्हा मेरे -419

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कान्हा मेरे वँशी तुम्हारी, मन को कितना रिझाती है । वँशी की धुन सुन के गोपियॉ, दौड़ी-भागी आती हैं । कैसे इशारे होते तुम्हारे, कैसे तुम उनको बुलाते हो । कोई भी उनको रोक न पाता, चुम्बक ऐसा लगाते हो । तेरा इठलाना,तेरी निगाहें, सब कुछ तेरा है अलबेला । तभी तो सबको छोड़ भागतीं, आते ही तेरी मधुर बेला । तेरा ध्यान और तेरी प्रीति, सब कुछ तो कर जाती है। मनुआ मेरा कहीं न भटके, ऐसा प्यार वो पाती है । दिल के गोकुल,मन की मथुरा से, तन द्वारिका पहुँचा ही दिया । बॉध के सब कुछ प्रेम-पाश में, रूप निराला दिखा ही दिया । मेरे कान्हा इसी तरह तुम, वशीभूत करते रहना । तेरे इशारे चले ये मनुआ, कसके डोर पकड़े रहना ।  .....ढीली डोर न कभी छोड़ना ।                                 👣🙏

मोक्ष -418

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 मोक्ष नहीं ना मुक्ति चाहिये   तेरे चरणों में स्थान चाहिये   जब - जब तू धरती पर आये   मुझको तेरा साथ चाहिये  धूल बनूँ तेरे चरणों की  या फिर हार बनूं सीने का   जो भी हो जैसे भी हो बस  केवल तेरा प्यार चाहिये   मैं जैसा भी.. तेरा ही हूं  और किसी आस नहीं है   दिल भी धड़के तेरे लिये ही   छोटी हो पर प्यास यही है ।                        👣🙏

तुम हो-417

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तुम हो मन का संसार मेरा तुम ही तो मन की ख़ुशबू हो चाहे जितना मैं फिरता रहूं मन की दुनिया में तुम ही हो जब भी आते हो ख्यालों में बेवजह मुस्कुरा जाता हूं तुम इर्द-गिर्द ही हो मेरे ये सोच के ख़ुश हो जाता हूं तुम चाहे जितना दूर रहो मैं पास तुम्हें उतने पाता भीतर में तुम हो छुप जाते मैं इधर उधर ढूंढा करता तेरी यादों में खोया रहता तेरी ख़ुशबू को सूंघा करता !!                          👣🙏