संदेश

नींद में भी बड़बड़ाना(आध्यात्मिक)-238

नींद में भी बड़बड़ाना,                  आदत ही अब हो गई है । साथ में हर पल ही रहना,                  आरज़ू सी ही बन गई है । रात का मंज़र बड़ा ही,                  ख़ुशनुमा हो जाता ह...

तुम्हारे नूर के आगे दाता(आध्यात्मिक)-239

तुम्हारे नूर के आगे दाता, नूर जहाँ के सब फीके हैं । वही नूर इस दिल में रहता, जिसके सहारे हम जीते हैं ।                  जब चाहो अन्दर में देखो,                  जब चाहो बाहर आ जाओ...

भाव भरी पुलकन के आगे(आध्यात्मिक)-206

भाव भरी पुलकन के आगे, शब्द कहीं खो से जाते हैं । गहरे में कहीं उतर गये हैं तो, बार-बार भावुक हो जाते हैं ।              कहते हैं शब्दों से ज़्यादा,              भाव प्रबल हुआ करते ...

तेरे चमन में मेरे गुरुवर(आध्यात्मिक)-240

तेरे चमन में मेरे गुरुवर,             कितने फूल खिला करते हैं । सुख-दुख,हर्ष-विषाद के न्यारे,              कितने रंग दिखा करते हैं । सुख आने पर भूल न जाना,              मुझे तुम्...

आते हो जब भी मिलने तुम(आध्यात्मिक)-241

आते हो जब भी मिलने तुम,             जाने की जल्दी क्यूँ रहती है । नींद भी पूरी हो ना पाती,             उठने की जल्दी क्यूँ रहती है । ख़्वाब में आना ख़्वाब नहीं,               वो स...

फागुन का महीना आते ही मुझको(आध्यात्मिक)-242

फागुन का महीना आते ही मुझको,             जाने क्या-क्या हो जाता है । रोंआ-रोंआ खिल उठता है मेरा,              प्रेम का झरना बहता जाता है । बिन पीये भी पीने का,              एहसास ...

मन से जुड़ते रिश्तों का(आध्यात्मिक)-243

मन से जुड़ते रिश्तों का,          कोई नाम हुआ ना करता है । तुझसे जुड़ जाने पर तो कान्हा,              तेरा ही नाम हुआ करता है । नाम नहीं बदनामी होती,         ऐसा सभी कहा करते हैं । ...