आते हो जब भी मिलने तुम(आध्यात्मिक)-241
आते हो जब भी मिलने तुम,
जाने की जल्दी क्यूँ रहती है ।
नींद भी पूरी हो ना पाती,
उठने की जल्दी क्यूँ रहती है ।
ख़्वाब में आना ख़्वाब नहीं,
वो सच में हक़ीक़त होता है ।
जैसे सामने बात न हो सके,
तो फोन पर कोई कहता है ।
ऐसा ही है तेरा भी मिलना,
इधर जुड़े कुछ उधर से जुड़ते ।
दोनों तरफ़ के तार हैं जुड़ते,
तब जाकर के दिल से जुड़ते ।
तुम्हारी इबादत, ग़ज़ब इबादत,
ऐसे भी कोई किया करता है ।
तेरे आने की चाहत में यहॉ पर,
हर वक़्त एक दिया जलता है ।
मन की बाती जलती रहती है,
दिल भी उसमें घी डाला करता है ।
तन तो केवल पड़ा-पड़ा बस,
तेरा ही मंत्र जपा करता है ।
तुम तो केवल इतना भर कर दो,
दोनों ही तार जुड़े रहने दो ।
यहॉ से मैं जो संदेशा भेजूँ,
उसको तुम तक पहुँचने दो ।
......दिल के दो तारों को जुड़ने दो।
.......भाव प्रवाहित होने दो ।
👣🙏🏻
9/2/18
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