तेरे चमन में मेरे गुरुवर(आध्यात्मिक)-240
तेरे चमन में मेरे गुरुवर,
कितने फूल खिला करते हैं ।
सुख-दुख,हर्ष-विषाद के न्यारे,
कितने रंग दिखा करते हैं ।
सुख आने पर भूल न जाना,
मुझे तुम्हारी सख़्त ज़रूरत ।
सबके साथ तुम्हें भी न भूँलू,
सँभाले रखने की है ज़रूरत ।
दुख आने पर बिखर न जाऊँ,
टूट न जाये दिल मेरा ।
दिल के भीतर छुपा के रखना,
तेरे ही दिल में दिल मेरा ।
हर्ष तो आकर सीमायें सब,
लॉघ ही जाया करता है ।
हाथ मेरे दोनों फैलाकर,
ख़ुशी जताया करता है ।
विषाद की अपनी मर्यादा है,
छुप-छुप कर वो रोता है ।
कोई किसी के ग़म में आख़िर,
कब तक साथ में होता है ।
इसीलिये इन सब रंगों को,
अपने पास रखे रहना ।
जब-जब जो देना हो तुमको,
थोड़ा-थोड़ा देते रहना ।
......बिखरे रंग समेट लेना ।
......धीरे-धीरे देते रहना ।
👣🙏🏻
9/2/18
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