तुम्हारे नूर के आगे दाता(आध्यात्मिक)-239
तुम्हारे नूर के आगे दाता,
नूर जहाँ के सब फीके हैं ।
वही नूर इस दिल में रहता,
जिसके सहारे हम जीते हैं ।
जब चाहो अन्दर में देखो,
जब चाहो बाहर आ जाओ।
चारों तरफ़ है नूर ही तेरा,
जितना चाहो उसमें नहाओ ।
टेसू के फूलों को हम जैसे,
पानी में भिगोया करते हैं ।
वैसे ही इस नूर को प्यारे,
दिल में हम डुबोया करते हैं ।
टेसू के रंग से तो केवल,
तन ही पीला हो पाता है ।
तेरे नूर के रंग से तो दाता,
तन-मन दोनों पीला होता है ।
इसी नूर की वारिश दाता,
सब पर अच्छे से कर देना ।
तन और मन अच्छे से भीगें,
ऐसा कुछ चमत्कार कर देना ।
.......सबके मनों को रंग देना ।
......सभी को ख़ुशहाली देना ।
👣🙏🏻
10/2/18
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