मन से जुड़ते रिश्तों का(आध्यात्मिक)-243
मन से जुड़ते रिश्तों का,
कोई नाम हुआ ना करता है ।
तुझसे जुड़ जाने पर तो कान्हा,
तेरा ही नाम हुआ करता है ।
नाम नहीं बदनामी होती,
ऐसा सभी कहा करते हैं ।
ख़ून के रिश्तों में भी प्यारे,
कितने दर्द सहा करते हैं ।
अनकहे तुझसे जुड़ जाना,
किसी के बस की बात नहीं ।
तू ही ख़ुद से जोड़ना चाहे,
फिर तो किसी की बिसात नहीं ।
क्या नाम-परिभाषा दूँ मैं,
कुछ भी तो समझ नहीं आता ।
प्यार का सागर हो तुम मेरे,
और कहूँ क्या तुमसे मैं दाता ।
जो भी हो,इस मन के रिश्ते को,
अच्छी तरह निभा ले जाना तुम ।
जलती-बुझती इस बाती को,
अपने साथ दूर ले जाना तुम ।
.......कैसे भी साथ निभाना तुम ।
.......चरणों में जगह बनाना तुम ।
👣🙏🏻
8/2/18
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