नींद में भी बड़बड़ाना(आध्यात्मिक)-238
नींद में भी बड़बड़ाना,
आदत ही अब हो गई है ।
साथ में हर पल ही रहना,
आरज़ू सी ही बन गई है ।
रात का मंज़र बड़ा ही,
ख़ुशनुमा हो जाता है ।
ख़्वाब में रहते हो तुम,
और साथ भी हो जाता है ।
आते हो तब साथ में तुम,
क्या खुशबुयें ले आते हो ।
टूटने पर ख़्वाब के कुछ,
तुम दर्द ही सा दे जाते हो ।
क्या मुनासिब है नहीं,
कुछ और पल तुम साथ रहते ।
मैं कुछ तुमसे अपनी कहती,
कुछ तुम भी अपनी बात कहते ।
कुछ भी हो,कैसे भी हो,
एहसास तो कुछ देते जाओ ।
मौजूदगी हर पल तुम्हारी,
महसूस हो..कुछ करके जाओ ।
रंगों के त्यौहार का महीना,
कुछ खुशबुयें बिखराते जाओ ।
तन्हाई के लम्हात में कुछ,
गीत गुनगुना करके जाओ ।
👣🙏🏻
11/2/18
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