हो सके तो ज़िन्दगी आसान रहनी चाहिए मन कुटिल और दिल कृपण ऐसा न होना चाहिए कौन जाने कब तलक माला मिली है श्वॉस की कौन जाने कब तलक है ज़िन्दगी की आस भी कर चलो ऐसा करम जो याद आना चाह...
मौत तू किसी का इन्तज़ार क्यों नहीं करती आया जब भी मन में साथ लेकर--चलने का किसी को ? तो---पूछा भी नहीं----सोचा भी नहीं ? बस लिया साथ उसको और---आगे चल दी ये कैसा ले जाना है कुछ तो समय दिय...
आज कलयुग का प्रभाव बड़ों पर ही नहीं बच्चों(मेरे युवाओं)पर भी दिखाई देने लगा है ना जाने क्यों भावनाओं का अभाव रिश्तों का अभाव संबोधन का अभाव न उम्र का लिहाज न मर्यादा की लाज ...
अंहकार चींटी से भी छोटा वैसे बहुत महान,बहुत बड़ा ले डूबता है जीवन को शालीनता-नम्रता से बहुत दूर एहसास भी नहीं होने देता ख़ुद को कि---- मैं घुस चुका हूँ भीतर तुम्हारी निश्छलता, ...
वासनाओं का जाल कब से बिछा है पता नहीं चौरासी लाख़ योनियों का सुना तो है मग़र एहसास नहीं फिर भी ना जाने क्यों कुण्डलिनी की जगह वासनाओं का सर्प जड़ जमाये बैठा है सॉप की तरह फु...
खोजता हूँ किसको नहीं मालूम मुझे तुम जो चले गये छोड़कर मुझको शायद वही टीस बाकी है मुझमें कहते हैं कि तुम शरीर नहीं--- चेतना हो---- उस चेतना को समझूँ उसी को महसूस करूँ लेकिन--- रूबरू ...
तृष्णा का भंडार खाली ही नहीं होता चाहता तो बहुत हूँ कि----- कैसे भी बुझ जाये ये प्यास न जाने जन्म-जन्मान्तरों से आ रही है मेरे साथ तभी तो कितना भी प्रयास करूँ इस आग को बुझाने का क...