अहंकार(निज भाव)-24
अंहकार
चींटी से भी छोटा
वैसे बहुत महान,बहुत बड़ा
ले डूबता है जीवन को
शालीनता-नम्रता से बहुत दूर
एहसास भी नहीं होने देता
ख़ुद को कि----
मैं घुस चुका हूँ भीतर
तुम्हारी निश्छलता, पवित्रता और
मासूमियत को----
ढक चुका हूँ मैं
अपने आवरण से
हटाने में मुझको सदियाँ गुजर जायेंगी
फ़िर भी हटा नहीं पाओगे
सूक्ष्म से भी सूक्ष्मतर हूँ मैं
तभी तो दिखता नहीं
घुस जाता हूँ तुम्हारे भीतर
मैं हूँ अंहकार
कुछ हो जाने का----
कुछ पाने का----
कुछ बन जाने का----
💔💔🖤💔💔
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