वासना(आध्यात्मिक)-25
वासनाओं का जाल
कब से बिछा है
पता नहीं
चौरासी लाख़ योनियों का
सुना तो है मग़र एहसास नहीं
फिर भी ना जाने क्यों
कुण्डलिनी की जगह
वासनाओं का सर्प
जड़ जमाये बैठा है
सॉप की तरह फुफकार कर
अपना फन चाहे जब
उठा ही लेता है
जड़ से ही मिटाना होगा
मेरे गुरुदेव वासनाओं के जाल को
उखाड़ फेंको तुम ही---
मेरे दाता---
इंसान के वश की बात ही नहीं
वो तो कठपुतली है तुम्हारे हाथों की
घुमाने वाले तुम ही---
नचाने वाले तुम ही---
मुक्त करो इस जंजाल से
मुक्त करो मेरे दाता
मुक्त करो !
👣🙏
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