खोज(आध्यात्मिक)-26
खोजता हूँ किसको
नहीं मालूम मुझे
तुम जो चले गये
छोड़कर मुझको
शायद वही टीस बाकी है मुझमें
कहते हैं कि तुम शरीर नहीं---
चेतना हो----
उस चेतना को समझूँ
उसी को महसूस करूँ
लेकिन---
रूबरू देखने की
चरणों में बैठने की
मन की बात कहने की
आदत सी हो गई थी
देखता आज भी हूँ
चरणों में बैठता आज भी हूँ
मन की बात आज भी कहता हूँ
फिर भी----
ना जाने क्यों----
कुछ खालीपन लगता है बार-बार
इसलिए----
खोजता हूँ तुम्हें
👣🙏
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