कलयुग(सामाजिक)-23
आज कलयुग का प्रभाव
बड़ों पर ही नहीं
बच्चों(मेरे युवाओं)पर भी
दिखाई देने लगा है
ना जाने क्यों भावनाओं का अभाव
रिश्तों का अभाव
संबोधन का अभाव
न उम्र का लिहाज
न मर्यादा की लाज
वैज्ञानिक युग ने तरक्की तो की
लेकिन दिल को मिटाकर, दिमाग को
चालबाज बना दिया
मॉ में भी हीरोइन चाहिये
मॉ में भी स्टाइल चाहिये
माँ में मॉ नहीं यार चाहिये
मॉ और घर में प्यारी सी पत्नी के होते हुए
फेसबुक पर फ़्रेंड चाहिये
उम्र चाहे कितनी भी क्यों न हो
चलेगा ही नहीं दौड़ेगा
शायद संस्कार परम्परा
इसीलिये जरूरी थी
काश ? ये प्यारे बच्चे
समझ पाते रिश्तों की मर्यादा
तो शायद किसी भी महिला के साथ
ऐसा सोच भी नहीं पाते
आज का दिन यही विचार करने का दिन ?
रक्षा-सूत्र,रक्षा-बंधन का दिन ?
दोस्त का बहुत गूढ़ अर्थ है ?
शरीर से ऊपर उठकर---?
आत्मा से जुड़ाव-----!
💔💔🖤💔💔
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