बीत गए-392

बीत गए कितने दिन देखे
कैसे गुजरे हैं ये साल
लगता है तुम दूर नहीं हो
अब भी हो तुम मेरे पास
तरस रही हैं अंखियां मेरी
देखत हैं ये चारों ओर
रात गई सब पहर हैं बीते
होने वाली है अब तो भोर
दरश को प्यासा है मन मेरा
बाट तिहारी जोहत है
आ जाओ एक बार कन्हैया
बांदी तुम्हारी रोबत है
इतने निष्ठुर कभी नहीं थे
बरसाया बस तुमने प्यार
आज तमन्ना पूरी कर दो
आ जाओ फ़िर से एक बार
मत तरसाओ मेरे दाता
आ जाओ बस आ जाओ
एक बार तिरछी चितवन से
देख इधर मुसका जाओ!!
                  @शशिसंजय

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