तुम हो-389

दर्द भी तुम हो दवा भी तुम हो
उम्र भी तुम हो दुआ भी तुम हो
आती जाती सांस भी तुम हो
रोम-रोम की जान भी तुम हो
नसों और नाड़ियों में तुम हो
ख़ून की हर बूंद में तुम हो
अस्थि और मज्जा में तुम हो
तन और मन ये सभी ही तुम हो
इच्छा-अनिच्छा ये भी तुम हो
चाहत और नफ़रत भी तुम हो
काया और माया भी तुम हो
बस तुम ही तुम हो........
बस तुम ही तुम हो........
तुम्हीं रूबरू हो............
तुम्हीं रूबरू हो...........!!
                  @शशिसंजय

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