यादों के झरोखे में(आध्यात्मिक)-4
यादों के झरोखे में जब भी झॉका
कुछ अच्छा सा महसूस हुआ
तेरे सामनेे सजदा किया और
चरणों को तेरे मैंने छुआ
जो पल बैठ गुजारे मैंने
छॉव में तेरी हँसते हुए
सारे तीरथ पाये अब तक
ख्व़ाबों में तेरे जीते हुए
आज भी वो हर लम्हा मेरे
ज़ेहन में तूने आबाद किया
इसीलिए तो प्यारे अब तक
हर छन को मैंने जी भर के जिया
लोग कहें मैं हुई बाबरी
या फ़िर हो गई सन्यासी
दिल की बात को कोई न जाने
मैं तो हो गई केवल दीवानी
शरणागत तेरी हुई ये काया
तन-मन से हुई मैं बेगानी
👣🙏
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