कैसे कह दूँ(आध्यात्मिक)-2
कैसे ये कह दूँ मैं भी
कि संसार ही अपना है
तेरे सिवा तो मुझको
सब दिखता सपना है
पिछले जन्मों के बंधन
इस बार भी आये हैं
लेन-देन बाक़ी था जिनका
लेने सब चलते आये हैं
जब-जब नैया डूबन लागी
तब-तब ही मैं मन से हारी
संसार छोड़ भागा
तब तूने ही संभाला
बड़े-बड़े निर्णय---
लेने की बारी आई
तब तूने ही तो मुझको
आकर दिशा दिखाई
फ़िर भी मैं ना मानी और---
पूछने लगी थी तुझसे
कैसे मानूँ बताओ कि
तुम ही मिले थे मुझसे
तुमने प्रमाण देकर
जब मुझको सब बतलाया
ऑखें थीं बन्द मेरी
कुछ इस तरह रुलाया
वो आज का ही दिन था
ये प्रूफ़ तुमने छोड़ा
बरसों गुजर चुके हैं जब---
तुमने ख़ुद से मुझको जोड़ा ।।
👣🙏
19/9/18
(रामदेवरा जयन्ती)
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें