तुझसे लगन(आध्यात्मिक)13
तुझसे लगन लगी है जबसे
नींद नहीं मुझको आती है
हर पल- हर छिन जाने क्यों
बस तेरी याद सताती है
युगों युगों से तेरे दर पर
सबने ही ख़ुद को खोया है
फ़िर भी कितना निष्ठुर है तू
गहरी नींद में सोया है
पहले प्यार का अलख़ जगाकर
अनहद नाद सुनाता है
तेरी याद में रोता फ़िर वो
जग में पागल कहलाता है
प्यारे अब तो दया दिखा दो
फ़िर से वही संगीत सुना दो
मैं और तू का भेद मिटा दो
मुझको ख़ुद में आज समा लो
👣🙏
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