तेरे वास्ते(आध्यात्मिक)-20

तेरे वास्ते दुनिया के
हर इल्ज़ाम को सिर पर रखा है
तेरे वास्ते दुनिया के कड़वे
हर घूँट को हरदम पीया है
हर पल तेरी रीत रही है
ख़ुद बैठ इम्तिहां लेने की
तुझे चाहने वालों की
अब तक की दास्ताँ यही रही
पर जो ना डिगा राह से
तूने गले लगाया है
बड़ी-बड़ी चट्टानों ने उसके
आगे शीश झुकाया है
भीतर भी तू-बाहर भी तू
ये सबको तो पता है नहीं
तेरी ही ख़िदमत आगे-पीछे
करते रहते हैं यहाँ सभी
           !मेरे सतगुरु!
               👣🙏

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