बेचैन(सामाजिक)-5
बेचैन हुआ जाता हूँ
परेशान लोगों की परेशानी देखकर
ख़ुद की तो ख़बर ही नहीं मुझको
तुमने ये सिखाया भी तो नहीं
दुआ के लिए हाथ उठाता हूँ जब भी
पूछते हो तुम कि-बोल क्या चाहिए ?
कह न पाता हूँ कुछ ठीक से तुमको
बस---मॉगता हूँ दीन दुखियों की बाबत
जो मन से दीन और दिल से दुःखी हैं
दे दिया कर मेरे मौला----उन मेरे प्यारों को
कि उनका मन अमीर हो और दिल सुखी हो जाये
ताकि वे सचमुच कर सकें दया उन पर
जिनको उनके सहारे की जरूरत है
👣🙏
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