पितृपूजा(सामाजिक)-6

जगह-जगह आजकल
पितृपूजा चल रही है
जानते हैं हम सभी भी
बस मानते कुछ भी नहीं
आने वाला कल हमारा भी
ऐसा ही होगा न ---?
आज स्थूल शरीर से चल-फिर रहे हैं
कल सूक्ष्म शरीर में रहना होगा
फिर भी कोई छोड़ने की बात
ही नहीं करता क्यों कि
रिश्तों ने,धन ने, प्रसिद्धि ने,
ख़ूबसूरती ने,और भी ना जाने
किन-किन चीज़ों ने, चिपका रखा है
इंसान को अपने आपसे----
जीते जी छोड़ दिया तो--- फिर तो
घर में रहते भी सन्यासी हैं
और कुछ भी ना छूटा अगर तो
सारी इन्द्रियॉ अभी भी प्यासी हैं

                          💔💔🖤💔💔

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