जो छूटा नहीं(आध्यात्मिक)3

जो छूटा नहीं-रूठा भी नहीं
वो हर पल पास ही रहता है
कैसे करूँ शुकराना उसका
हर श्वॉस में भी वो रहता है
पूछते हैं कभी कुछ प्यारे
क्या वो-- याद नहीं आते  ?
कैसे बताऊँ उनको दाता
दूर नहीं हो तुम मुझसे
तुम्हारे प्यार का दिया हमेशा
इस दिल में जलाकर रखा है
तुमसे मिली हर सीख को मैंने
यादों के पिटारे में सजा रखा है
रूह का रूह में समा जाना
ये ही तो रीत रही अब तक
क्या भूलूँ क्या याद करूँ मैं
तुम याद न दिलाओगे जब तक

                       👣🙏

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

याद आपकी-428

दृष्टा-425

कर्म -426