सिद्ध सन्त(आध्यात्मिक)-17

सिद्ध सन्तों के पास
जाते-जाते हम
हर समय कुछ न कुछ
याचना ही करते रहते हैं
और वे भी-----
सबकी मुसीबतों और कष्टों को
हरते ही रहते हैं
लेकिन-----
उनके शरीर त्याग देने पर
हम अपने स्वार्थ में लीन हो जाते हैं
और करने लगते हैं ----
गन्दी राजनीति ,एक दूसरे को नीचा दिखाना,
हर बन्दा मठाधीश बनने का सपना
सँजोने लगता हैं----?
अरे----? कौन समझाए उन्हें कि----?
कोई विवेकानंद, शिवाजी, कबीर, रैदास
जैसा शिष्य ही नहीं मिला उन्हें, कि जिन्हें वे---
अपनी शक्तियों का भंडार देकर जाते
सिद्ध पुरुष न कभी मरते हैं न कभी मरेंगे
चाहे जो भी हो, वे हर पल मौज़ूद हैं
ये अटल भरोसा रखकर
उनका छोड़ा गया कार्य करना चाहिए
न कि ऐसा कोई काम
जिससे उन्हें कष्ट पहुँचे क्यों कि
वे तो कल भी थे, आज भी हैं,और आगे भी रहेंगे

                                     👣🙏
                              

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