दिले शायरी -64

---रूह से रूह कुछ इतनी बदल सी गई है,
    कि "मैं" को मिटाकर वो "तू" हो गई है!!

---भटकता हूँ जब भी यूँ तुझसे बिछड़कर,
    सबक याद आते हैं तब रह-रह के मुझको!!

---तेरा आसरा ही बचाता है मुझको,
    तुझी में समाने को जी चाहता है!!

---सबक एक तू ही पकड़ मैं न पाया,
    तभी फासले हैं तेरे मेरे दरम्यान!!

---तू इतना फ़ना कर  कि रोता रहूँ मैं,
    कशिश तेरी हरदम सताती है मुझको!!

---याद आते हैं मुझको वो बीते हुये पल,
    सज़दे में तेरे यूँ सर को झुकाना!!
                                   @शशिसंजय

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