दिले शायरी-62
---क्या कुछ नहीं दिया तूने मुझको मेरे सतगुरु
मैं ही हूँ जो कभी शुकराना अता न कर पाया!!
---हर कदम साथ चलकर तुमनेे साथ निभाया है
दिखते नहीं किसी को ऐसी तुम्हारी माया है!!
---तुम्हारी रहमतों पै ज़िन्दा हूँ तुम्हीं ने सँभाल रखा है
वरना तो कब का टूटकर बिखर गया होता!!
---मेरे प्रीतम मेरे दाता मेरे सतगुरु मेरे मौला मेरे यारा
हर रिश्ता तुम्हीं से है किसी और की बात करूँ कैसे!!
---हर वक्त ख़्यालों में तुम्हारे जीता हूँ सतगुरु-मेरे
तेरी एक तिरछी सी निगाह के लिए बेताब हूँ कबसे !!
---तुमने जब से मुझे अपने ऑचल में जगह दी है
तब से अभी तक भी बड़ा महफ़ूज रहता आया हूँ!!
@शशिसंजय
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