खुशियाँ-378

खुशियाँ तेरे इर्द-गिर्द हैं
खुशियों को तू ढूँढा कर
दिल में रखकर बात किसी की
मन से मत तू रूठा कर
छोड़ छाड़ कर मन के नाते
सबसे फ़र्ज निभाया कर
बाक़ी सब बेकार के फन्दे
लौ उनसे ही लगाया कर
कर्ज़दार सब पड़े हैं पीछे
सबका कर्ज चुकाया कर
ऊपर से सब निभाले रिश्ते
दिल में उन्हीं को बिठाया कर
गुरु ही तेरे तू है गुरु का
इसी बात को समझा कर
बाक़ी सब तो लेन-देन हैं
इस जीवन में चुकता कर!!
               @शशिसंजय

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