दाता तेरी करुणा(आध्यात्मिक)-324
दाता तेरी करूणा के झरने,
लगातार बहते रहते हैं।
इन झरनों की मस्ती में हम ,
ख़ूब नहाया करते हैं ।
आशीर्वाद की मुद्रा तेरी,
हमको ख़ूब सुहाती है।
किरणें तेरी निकल निकल,
सीने में घुस जाती है।
नज़रें तेरी प्यार भरी,
जब ऑखों से टकराती हैं।
अविरल धारा बहकर मेरे,
अधरों को छू जाती हैं।
आवाज़ तेरी मधुरी-मधुरी,
जब सुनने को मिल जाती है।
लगता है जैसे कोयल मुझको,
मनभावन गीत सुनाती है ।
चरणों में प्यारे बैठ के मुझको ,
दुनिया का ख़्याल नहीं रहता।
शरण में तेरी , शरण में तेरी ,
बस ये ही तार बजा करता ।
मेरे मुर्शिद तुम भी क्या हो ,
बहुत बड़े जादूगर हो ।
तरह-तरह के रूप लुभावन ,
सबको ख़ूब दिखाते हो ।
👣🙏🏻24/12/17
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