मेरे दाता काम नहीं कुछ(आध्यात्मिक)-325
मेरे दाता काम नहीं कुछ,
फिर भी व्यस्त मैं रहती हूँ।
तेरे ख़्याल में हरपल रहकर,
तुझको खोजा करती हूँ।
साथ में रहकर भी मुझको तुम ,
ख़ूब छकाया करते हो ।
भीतर से बाहर आने में तुम ,
क्यूँ देर लगाया करते हो ।
रस्ता बड़ा ही सँकरा है पर ,
तुमको आना ही होगा ।
ट्रैफ़िक नहीं कहीं पर भी ,
अब ट्रैफ़िक जाम नहीं होगा ।
कोई नया बहाना ढूँढो ......😀
मेरे दाता चतुर हो तुम ।
भक्तों के बेहाल.. हाल पर,
कुछ तो दया दिखाओ तुम ।
"हिन्दरूस्तमे" कुछ तो बोलो ,
कैसे हो क्या हाल है ।
बलि-बलि जाऊँ मैं तो तुम पर ,
क्या इठलाती चाल है ।
मेरे कन्हैया चितवन तेरी ,
कितनों को घायल करती है।
हुये न्योछावर जो भी तुम पर,
सबको निहाल करती है.....।
मालामाल करती है ।
👣🙏🏻
26/12/17
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