गुरु चरणों में(आध्यात्मिक)-323
गुरु चरणों में सिर को रखकर,
सारा भार उतर जाता है।
तिरछी चितवन डालते ही बस,
सारा प्यार उमड़ जाता है।
हरदम आपकी कृपा बरसती,
पल-पल के अनुदानों में।
आपकी शक्लोसूरत रहती,
हर पल मेरे ख्यालों में।
दिल में उनके चरण समाये,
प्यारी सूरतिया साथ में।
दाता आपकी चाहत रहती,
मेरे ख्वाब और याद में।
ध्यान धारणा जप तप पूजा,
मेरे बस की बात नहीं।
तुमको प्यारे देखते रहना,
बस मेरी औक़ात यही।
ना कुछ मेरे बस की गुरुवर,
तुम जो चाहो कराओगे।
मेरी करुण पुकार को सुनकर,
तुम दौड़े ही आओगे।
दृढ़ विश्वास है मुझको दाता,
याद तुम्हें भी आती है।
मेरे मन के मीत मुझे भी,
मूरत तेरी भाती है,
- - - - - याद भी बहुत सताती है।
21/12/17
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