आ जाओ मेरे दाता(आध्यात्मिक)-319
आ जाओ मेरे दाता,
मेरी रूह में समाओ.
भीतर में जब भी देखूं,
जलवा(दर्शन) मुझे दिखाओ.
-खाली पड़ा है घर(शरीर) तो,
प्यारे बिना तुम्हारे.
मैंने सुना है तुम भी,
रहते हो साथ हमारे।
-कैसे मैं तुमसे मिल लूं,
मेरी समझ न आता।
दुनिया के झंझावातों में,
मन नहीं रमाता।
-आ जाओ अब तो प्यारे,
मैं तुमको ढूँढती हूँ।
सूनी पड़ी है नैया,
पतवार ढूँढती हूँ।
-पक्का पता है मुझको,
मेरा ध्यान तुम ही रखते।
मेरी रुह के खिवैया,
मेरी देह को चलाते।
-एक बार रुबरु हो,
मुझे सान्त्वना दिला दो।
आकर के मुझको प्रीतम,
इक बार गले लगा लो।
8/12/17
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