दिले शायरी -3

--हाथों में पत्थर नहीं, फिर भी चोट देती है,
         ये जुबान भी अजीब है.....…
               अच्छे-अच्छों के.......
         घर (दिल) तोड़ देती है.

--- लोगों ने दिया तो सुनाया भी बहुत कुछ,
      मेरे दाता..... एक तेरा ही दर है,
            जहाँ कभी ताना नहीं मिला.

--अच्छे होते हैं हम जैसे बुरे लोग,
         कम से कम अच्छा होने का,
                 दिखावा तो नहीं करते.

--लफ्ज़ आइने हैं, मत इन्हें उछाल के चलो,
अदब की राह मिली है तो, देखभाल के चलो,
मिली है जिन्दगी तुम्हें, बस इसी मकसद से,
    संभालो खुद को और, अपनों को संभाल के चलो.

--अपनी पीठ से निकले, खंजरो को जब गिना मैंने,
ठीक उतने ही निकले, जितनों को गले लगाया था.

--एक ख्वाब ही था जिसने साथ न छोड़ा,
हकीकत तो बदलती रही, हालात के साथ.

                                     3/12/17

                                         

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