नाव में तेरी(आध्यात्मिक)-326
नाव में तेरी बैठ के दाता,
मुझको ख़ूब मज़ा आता है।
हिचकोले खाती नैया पर,
तुझपै भरोसा दृढ़ होता है।
ऊबड़ खाबड़, उथला पानी,
लहरें उछल उछल जाती हैं।
नैया मेरी डगमग डोले,
" केवट " उस पर भारी है ।
मेरे केवट, मेरे गुरूवर,
तुम भी क्या बस ख़ूब हो ।
उछल कूद कितना मैं करती ,
तुम सँभालते ख़ूब हो ।
जब जब राह भटक जाती हूँ ,
तुम ही दिशा दिखाते हो ।
तुम समर्थ दाता हो मेरे ,
तभी तो चलना सिखाते हो ।
उम्र बढ़ रही लेकिन प्यारे ,
मन अब भी बच्चों जैसा है ।
बच्चों जैसी ज़िद के आगे ,
तुम्हारा साथ बड़ों जैसा है ।
नाव का चप्पू तुम ही चलाते ,
मेरे जीवन की डोर सँभाले ।
क्या कहूँ मेरे प्यारे दाता ,
तुम हो खिवैया मेरे न्यारे ।
चलती हूँ ...मैं ... तेरे सहारे ।
👣🙏🏻
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