आंखन देखी(आध्यात्मिक)-227

कर्मों की जब ओढ़ चुनरिया, दाता के घर जाऊँगी।
ना जाने क्या-क्या कर बैठी, ये सब उन्हें बताऊँगी।

_वो सब जानें वो सब बूझें, फिर भी सुन मुस्कायेंगे।
  प्यार से सिर पर हाथ रखेंगे, थोड़ी सी डॉट लगायेंगे।

-काम-धाम कुछ कर ना पाई, ना ही पूजा पाठ भी।
  फिर भी हरदम साथ रखी है, यादें उनकी आज भी।

-याद ही आना याद ही करना, ये भी तो एक पूजा है।
  यादों में ही बस जीते रहना, कर्म नहीं कोई दूजा है।

-काया यहीं रह जानी है बस, साथ नहीं कुछ जाना है।
  याद तेरी संग लेकर के जाना, ये ही पता ठिकाना है।
                                     11/12/17

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