तेरी सूरत(आध्यात्मिक)-322

तेरी सूरत, तेरी सीरत,
सब कुछ मन को भाती है।
करूणा तेरी अपार है दाता,
हरपल मिलती जाती है।

तेरा हौसला, तेरी ताकत,
तेरा ज्ञान जो तूने दिया।
सब कुछ तुझ पर ही  वारी है,
जितना प्यार भी तूने दिया

काया तेरी, माया तेरी,
सब कुछ तू ही कराता है।
मन भी तेरे वश में प्यारे,
तन को तू ही चलाता है।

कैसे कहूँ कुछ भी है मेरा,
तेरे सिवा कोई है ही नहीं।
जहाँ भी देखूं तू ही देखे,
मेरा सब कुछ है तू ही।

भीतर में बैठे - बैठे ही,
सारी दुनिया दिखाता है।
घर और बाहर चलते फिरते,
मुझको मौज कराता है।

कितने जन्मों शरण में तेरी,
मुझको मिली ये काया है।
मुझको कुछ भी याद नहीं फिर,
मन ये क्यूँ भरमाया है।

जो भी हो, जैसा भी हो बस,
सब कुछ यूँ चलने देना।
कठपुतली तेरे हाथों की,
डोर को तुम थामे रहना।
            घर-(दिल)                              
               बाहर-(मन)                 22/12/17
              
                                                 👣☔

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