खुशियों का अम्बार(आध्यात्मिक)-318

खुशियों का अम्बार लगा है,
दाता तेरे डेरे में,
लूट-लूट कर खुशियां लाये,
दाता तेरे मेले में,

-भर - भर झोली मिला है सबको,
जो गये तेरे मेले में,
  घर बैठे भी वारिश हो गई,
ना जा पाये जो मेले में.

- तुझकोसबकी फिकर हैकितनी,
सबके लिए तू करता है
हम ही तेरे कर्ज की किश्तें,
अदा न कर सके जीवन में.

- जीवन का हर लम्हा - लम्हा,
खून का एक-एक कतरा - कतरा.
तेरे ही कर्ज में डूबा प्यारे,
तेरी ही याद में जीता है.

-जीवन चुकना बाकी है,
और कर्ज भी चुकना बाकी है.
इसी बहाने हम दोनों का फिर,
हर जन्म में मिलना बाकी है.
                                      6/12/17

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

याद आपकी-428

दृष्टा-425

कर्म -426