बच्चों के मन को पहचाने(214)

बच्चों के मन को पहचाने, ऐसी प्यारी होती मां।
प्यार भरी जो डांट लगाये, खूब निराली होती मां।

दिल से सबको लाड़ लड़ाती, भीतर चिन्तित होती मां।
सिर पर प्यार से हाथ फिराती, ढेर दुआयें देतीं मां।

जब तक लौट न घर को आयें, सजदे में रहती है मां।
खुशहाली की मन्नत करती, घर में दीप जलाती मां।

तमाम गुनाह माफ कर देती, फिर से धीरज धरती मां।।
गुस्से में जब आ जाती तो, फूट - फूट रो देती मां।

कितनी बुलन्दी छूं लें फिर भी, गोदी तेरी ऊँची मां।
गोदी में जब तू ले लेती, आसमान हम छूते मां।

मां तुमको बचपन में खोया, प्यार तलाशा हर पल मां।
माताजी के रूप में मिली हैं, मुझको मेरी प्यारी मां।

सब बच्चों पर प्यार लुटाती, सबका ध्यान है रखती मां।
पल - पल में अहसास कराती, हूँ मैं सबके पास यहाँ।

मां हम बच्चे बड़े न होंगे, प्यार तुम्हारा मिलता रहे।
सब मांओं को शरण में लेना, जो - जो दूर हुई हमसे।

                                                17/12/17

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