गुरुगीता-73
एक बार मत्स्येन्द्रनाथ जी भिक्षा मांगने एक गाँव में गये | उस गाँव में एक रोती बिलखती एक स्त्री उनमे पैरो पर गिर गयी | गुरु मत्स्येन्द्रनाथ जी ने उसके दुःख का कारण पूछा | महिला ने बताया कि उसे संतान सुख की प्राप्ति नहीं हो रही है | मुझे माँ बनने का आशीर्वाद दें | गुरु मत्स्येन्द्रनाथ ने अपनी झोली से मन्त्र जाप के साथ एक चमत्कारी भस्म उस महिला को दी | उन्होंने बताया कि इससे तुम्हें पुत्र की प्राप्ति हो जाएगी और वे चले गये | महिला ने यह बात अपनी सहेलियों को बताई , सबने इस लीला को पाखंड बताया | महिला भी उनकी बातों में आकर खेत में गोबर की ढेरी पर भस्म को फेंक आई |
12 साल बाद फिर से मत्स्येन्द्रनाथ जी उसी गाँव से होकर गुजर रहे थे | उन्हें वही महिला मिल गयी | उन्होंने पूछा कि माई अब तेरा बच्चा तो 12 साल का हो गया होगा | कैसा है वो ?
महिला उनकी बातें सुनकर रोने लगी और भस्म को गोबर में गिराने की बात बता दी | मत्स्येन्द्रनाथ जी ने कहा कि वो दिव्य भस्म है और व्यर्थ नहीं हो सकती | तुम मुझे उस स्थान पर ले चलो |
महिला के साथ गुरु उस स्थान पर गये और उन्होंने उस बालक को पुकारा | बालक गोबर की ढेरी से बाहर निकला और अपने गुरु के चरणों में प्रणाम किया | गुरु ने उन्हें गोरखनाथ का नाम दिया और अपने साथ तपस्या के लिए ले गये |
समर्थ गुरु के लिए कुछ भी संभव है।
गुरुगीता पाठ
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मुक्तस्य लक्षणं देवि तवाग्रे कथितं मया ।
उपदेशो मया देवि गुरुमार्गेण दर्शित:।।79।।
अर्थ
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हे देवि मैंने मुक्त पुरुष का लक्षण तुम्हारे निकट कहा। यह उपदेश मैंने गुरुमार्गानुसार प्रदान किया है।जिन लोगों ने गुरु
सेवा का पथ ग्रहण किया है, उनके लिए यह उपदेश है।
79.
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Oh, devi I have described to you the manifestations of liberated personalities according to the preachings of the path to the Master's. The sermon is for those who have choosen the path of devotion of the Master.
👣🙏
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