दिले शायरी -60
---तुमने तो झट से कह दिया,रहता हूँ तेरे भीतर,
वो ऑखें कहॉ से लाऊँ,जो देख सके भीतर तुमको!!
---शब्दों की माला नहीं है पिरोने लायक,
भावनाओं का हार पहनाता हूँ,
घुटन सी होने लगती है जब भी कभी,
ऑसुओं की धार से तुझको नहला देता हूँ!!
---तेरा प्यार,तेरी रहमतें, तेरा ही सहारा
मिला है अब तक,
फ़िर भी मेरी नादानियॉ तुझको सताती आईं हैं!!
---खोटा सिक्का था तो मग़र,तेरे दर पर चल गया,
दुनिया तो हमेशा इधर-उधर खिसकाती रही!!
---तू करता है हरदम मुझ पर खुशियों की
बरसात सदा,दामन में छेदों के कारण
खुशियाँ भी छनकर निकल जातीं हैं!!
---हर पल शुकराना करूँ ये तो बहुत थोड़ा है,
हर जन्म का करूँ शुकराना,
तू ही बता वो कैसे करूँ!!
@शशिसंजय!!
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