दिले शायरी -58

--तुम्हारे देने के तरीक़े का अन्दाज़ कुछ निराला है,
   कुछ   मॉगने की सोचूँ,
  उससे पहले ही झोली भर देते       हो!!
      "मेरे सतगुरु-मेरे दाता"

--जब भी कभी आ जाती है याद तुम्हारी,
  जी भर के रोया भी नहीं जाता,
  सोचता हूँ कि कहीं मेरे रोने के दाग़,
  तेरे दिल पर न पड़ जायें!!

--तुम्हारे प्यार का साया
तुम्हारे प्यार की छतरी
बचाती आई है हरदम
अनहोनी से सदा मुझको!!
      "मेरे सतगुरु-मेरे दाता"

--इस बेमुरव्वत सी दुनिया में,
  सभी कुछ भूल जाने की आदत है,
  लेकिन तुम हो कि कैसे भी
  भुलाये नहीं जाते मुझसे!!

--बहुत दिन गुज़र गये
कि दूर तुम चले गये
बस याद ही है तुम्हारी
जो रोज़ मिलने चली आती है!!

--क़लम थम सी जाती है,
  खो जाता हूँ जब भी कभी,
  तेरी यादों के समन्दर में,
और तुझी से पूछने लगता हूँ,
  तेरी यादों औ बातों का किनारा!!
                            @शशिसंजय

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