शरण में तेरी-375

शरण में तेरी रहने पर ही
फ़ौलादी मैं बन पाया हूँ
जग ने जब-जब तोड़ना चाहा
उतना ही जुड़ता आया हूँ
तेरी ताकत - तेरी हस्ती
हरदम साथ ही रहती है
बाजू में कोई बस ना पाया
शमशानों की बस्ती है
जिस दिन समझ आ गई इतनी
फ़िर तो खुशियों का मेला है
वर्ना तो तेरे मेरे (दुनियादारी) बीच का
दिन और रात का रेला है !!
                @शशिसंजय

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