लगा बराबर मेला है-373
लगा बराबर मेला है
फ़िर भी कितना झमेला है
रिश्ते बनाने के चक्कर में
दौड़ रहा वो अकेला है
मिला न उसको कोई कहीं भी
सब मिट्टी के बरतन हैं
कितना ही तुम दिल से चाहो
सब मतलब के किस्से हैं
ख़ुद को ख़ुद से चाहोगे
तो जी भर तुमको प्यार मिलेगा
और नहीं कुछ मिलता तो भी
अपनेपन से प्यार तो होगा !!
@ शशिसंजय
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