तू ही तू --377
तू ही तू है सारे जग में
तेरे सिवा कुछ और न दिखता
फ़िर भी मैं हूँ मैं को पाले
मैं का अंहकार ना मिटता
सारे काम तेरे निपटाते
सब कुछ अच्छा सा कर जाते
तू है भिखारी उनके दर का
वो दाता है सारे जग का
फ़िर भी उसके दर पर आकर
अंहकार का दम है भरता
सॉसों का कुछ नहीं ठिकाना
अभी चल रही कब रुक जायें
कुछ कर जा अपने हाथों बन्दे
पता नहीं कब प्राण ये जायें
काया कब मिट्टी हो जाये !!
@शशिसंजय
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें