कभी याद आये -378
कभी याद आये तो
बचपन में जाना
जहाँ चलना सीखा
वो जगह याद करना
वो पापा के कँधे
था मॉ का जो ऑचल
गलती करके आते थे
तुम छुपने वहॉ पर
ज़िदों को भी अपनी
पूरी कराना,रोना मचलना
औ फ़िर रूठ जाना
वो दिन थे तुम्हारे और
हम भी बड़े थे
तुम्हारी जरूरत पै
हम हैं खड़े थे
मग़र आज सब कुछ
उलट सा गया है
बड़ा होना हमारा
कहीं खो सा गया है
बच्चे आज हम हैं
तुम बड़े हो गये हो
तभी तो हमारी
फ़िकर कर रहे हो
गले से तुम अपने
लगाये हुये हो !!
@शशिसंजय
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