दिले शायरी -71

क्या कहूँ मैं तुमसे परवरदिगार मेरे,
सब पर तुम्हारी रहमतों का साया बना रहे!!

हमारी ये उलझनें मकड़ी के जाले की तरहॉ हैं
एक तुम हो कि उनमें से भी रास्ता निकाल देते हो!!

मेरे सतगुरु-मेरे दाता,बस हाथ रख दो सिर पर,
मुझको ख़ुद पता नहीं क्यों याद तुम्हारी आती है!!

ख्व़ाबों में ख़्यालों में रहता हूँ हरदम ही साथ तेरे,
सतगुरु तुम्हारी छॉव मुझे धूप (कष्टों) से बचाती आई है!!

बिन कुछ कहे भी झोलियॉ भर देना सभी की
मेरे सतगुरु-मेरे दाता ये तुम ही कर सकते हो!!
                                     @शशिसंजय

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