दिले शायरी --70
तुमसे क्या छुपाऊँ, तुम जानते हो सब कुछ
दुनिया के देखने से,कुछ फ़र्क नहीं पड़ता!!
मुझसे ज़्यादा चिन्ता, रहती है तुमको मेरी
इससे अधिक उम्मीदें, मैं क्या लगाऊँ तुमसे!!
जितना दिया है अब तक, भरपूर ही दिया है
फ़िर भी तो मेरे दाता, हम मॉगते ही रहते !!
सतगुरु तुम्हारी शोहरत,भगवान से बड़ी है
सुन्दर तेरी मूरतिया, मेरे सामने खड़ी है!!
पता नहीं कितने जन्मों से,शरण में तेरी आया हूँ
अब तक भार उठाते आये,फ़िर भी मैं भरमाया हूँ!!
@शशिसंजय
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